Cart is empty

5 Mukhi Rudraksha

5 मुखी रुद्राक्ष के प्रमुख लाभ

🕉️ मानसिक शांति एवं एकाग्रता

मन को शांत एवं स्थिर रखने, तनाव कम करने तथा ध्यान एवं साधना में एकाग्रता बढ़ाने में सहायक माना जाता है।

📚 ज्ञान एवं बुद्धि में वृद्धि

विद्यार्थियों, शिक्षकों एवं आध्यात्मिक साधकों के लिए लाभकारी माना जाता है। यह विवेक, ज्ञान एवं निर्णय क्षमता को विकसित करने में सहायक माना जाता है।

🌿 सकारात्मक ऊर्जा

नकारात्मकता को दूर कर जीवन में सकारात्मक ऊर्जा, संतुलन एवं आत्मविश्वास बनाए रखने में सहायक माना जाता है।

❤️ स्वास्थ्य एवं संतुलित जीवन

धार्मिक मान्यताओं के अनुसार यह रक्तचाप को संतुलित रखने, मानसिक तनाव कम करने तथा समग्र स्वास्थ्य के लिए लाभकारी माना जाता है।

🪐 गुरु ग्रह को मजबूत करने में सहायक

जिनकी कुंडली में बृहस्पति (गुरु) कमजोर हो, उनके लिए यह रुद्राक्ष शुभ एवं लाभकारी माना जाता है।

🙏 आध्यात्मिक उन्नति

भगवान शिव की कृपा प्राप्त करने, साधना, जप एवं ध्यान में प्रगति तथा आध्यात्मिक विकास के लिए अत्यंत शुभ माना जाता है।


कौन धारण कर सकता है?

  • ✔ विद्यार्थी एवं प्रतियोगी परीक्षा की तैयारी करने वाले
  • ✔ शिक्षक एवं आध्यात्मिक साधक
  • ✔ व्यवसायी एवं नौकरीपेशा व्यक्ति
  • ✔ मानसिक शांति एवं सकारात्मक ऊर्जा की इच्छा रखने वाले
  • ✔ ज्योतिषीय सलाह अनुसार गुरु ग्रह को मजबूत करना चाहने वाले

धारण विधि
  • सोमवार या गुरुवार प्रातः स्नान के बाद धारण करें।
  • रुद्राक्ष को गंगाजल एवं कच्चे दूध से शुद्ध करें।
  • भगवान शिव का ध्यान कर धूप-दीप अर्पित करें।
  • “ॐ ह्रीं नमः” मंत्र का कम से कम 108 बार जप कर रुद्राक्ष धारण करें।

नोट: रुद्राक्ष के आध्यात्मिक एवं ज्योतिषीय लाभ धार्मिक एवं पारंपरिक मान्यताओं पर आधारित हैं। यह किसी भी प्रकार के चिकित्सकीय उपचार का विकल्प नहीं है।

5 मुखी रुद्राक्ष (Five Mukhi Rudraksha)

पांच मुखी (5 मुखी) रुद्राक्ष भगवान कालाग्नि रुद्र (भगवान शिव) का स्वरूप माना जाता है तथा यह बृहस्पति (गुरु) ग्रह से संबंधित माना जाता है। यह सबसे अधिक प्रचलित एवं सर्वसुलभ रुद्राक्ष है। धार्मिक मान्यताओं के अनुसार इसे धारण करने से मानसिक शांति, आध्यात्मिक उन्नति, ज्ञान, सकारात्मक ऊर्जा एवं जीवन में संतुलन प्राप्त करने में सहायता मिलती है।


अधिष्ठाता एवं ज्योतिषीय जानकारी

🔱 अधिष्ठाता देवता: भगवान कालाग्नि रुद्र (भगवान शिव)
🪐 अधिपति ग्रह: बृहस्पति (गुरु)
अधिपति राशि: धनु एवं मीन
🌟 अधिपति नक्षत्र: पुनर्वसु, विशाखा एवं पूर्वाभाद्रपद

🔮 बीज मंत्र: ॐ ह्रीं नमः
🕉️ मंत्र साधना: पूर्ण षोडशोपचार पूजन के साथ “ॐ ह्रीं नमः” मंत्र का 1008 बार जप

799.00

Products you may like ...
Shopping Basket