मन को शांत एवं स्थिर रखने, तनाव कम करने तथा ध्यान एवं साधना में एकाग्रता बढ़ाने में सहायक माना जाता है।
विद्यार्थियों, शिक्षकों एवं आध्यात्मिक साधकों के लिए लाभकारी माना जाता है। यह विवेक, ज्ञान एवं निर्णय क्षमता को विकसित करने में सहायक माना जाता है।
नकारात्मकता को दूर कर जीवन में सकारात्मक ऊर्जा, संतुलन एवं आत्मविश्वास बनाए रखने में सहायक माना जाता है।
धार्मिक मान्यताओं के अनुसार यह रक्तचाप को संतुलित रखने, मानसिक तनाव कम करने तथा समग्र स्वास्थ्य के लिए लाभकारी माना जाता है।
जिनकी कुंडली में बृहस्पति (गुरु) कमजोर हो, उनके लिए यह रुद्राक्ष शुभ एवं लाभकारी माना जाता है।
भगवान शिव की कृपा प्राप्त करने, साधना, जप एवं ध्यान में प्रगति तथा आध्यात्मिक विकास के लिए अत्यंत शुभ माना जाता है।
नोट: रुद्राक्ष के आध्यात्मिक एवं ज्योतिषीय लाभ धार्मिक एवं पारंपरिक मान्यताओं पर आधारित हैं। यह किसी भी प्रकार के चिकित्सकीय उपचार का विकल्प नहीं है।
पांच मुखी (5 मुखी) रुद्राक्ष भगवान कालाग्नि रुद्र (भगवान शिव) का स्वरूप माना जाता है तथा यह बृहस्पति (गुरु) ग्रह से संबंधित माना जाता है। यह सबसे अधिक प्रचलित एवं सर्वसुलभ रुद्राक्ष है। धार्मिक मान्यताओं के अनुसार इसे धारण करने से मानसिक शांति, आध्यात्मिक उन्नति, ज्ञान, सकारात्मक ऊर्जा एवं जीवन में संतुलन प्राप्त करने में सहायता मिलती है।
🔱 अधिष्ठाता देवता: भगवान कालाग्नि रुद्र (भगवान शिव)
🪐 अधिपति ग्रह: बृहस्पति (गुरु)
♐ अधिपति राशि: धनु एवं मीन
🌟 अधिपति नक्षत्र: पुनर्वसु, विशाखा एवं पूर्वाभाद्रपद
🔮 बीज मंत्र: ॐ ह्रीं नमः
🕉️ मंत्र साधना: पूर्ण षोडशोपचार पूजन के साथ “ॐ ह्रीं नमः” मंत्र का 1008 बार जप।
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